श्री मांडू आश्रम तीर्थ क्षेत्र व्यवस्थापक समिति
मांडू आश्रम तीर्थक्षेत्र पुरातन काल से ही संतों और ऋषियों की तपोस्थली रही है। गंगा तट का ये क्षेत्र अत्यंत शांत और विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा लिए हुए है। इसलिए इस क्षेत्र में विभिन्न पर्वों पर साधु-संतों और सनातनी भक्तो का अवगामन होता रहता है। समय-समय पर संतों के द्वारा यहाँ विहार किया जाता रहा है। विभिन्न संतों के द्वारा निर्मित आश्रम और उनकी कुटियाँ यहाँ स्थित हैं। गंगा का तट होने के कारण इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मांडू आश्रम तीर्थक्षेत्र का व्यवस्थापन पहले से ही स्थानीय निवासियों के द्वारा प्रशासनिक सहयोग से किया जाता रहा है। कार्य की सुगमता की दृष्टि से स्थानीय निवासियों व प्रशासन के द्वारा एक प्रबंधन समिति का चयन श्री मांडू ऋषि मंदिर, श्री मांडू ऋषि तीर्थ क्षेत्र व मांडू गंगा घाट के व्यवस्थापन हेतु किया जाता रहा है।
वर्तमान में श्री कृष्णा विरक्त जी महाराज, कुलाधीश, श्री रुद्र विरक्त मठ के मार्गदर्शन में गुरूभगवान धर्मार्थ ट्रस्ट के द्वारा तीर्थ क्षेत्र का व्यवस्थापन व विकास का कार्य किया जा रहा है। ट्रस्ट के द्वारा इस क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के द्वारा धर्म के प्रसार हेतु कार्य किया जा रहा है। आगंतुक भक्तों व संतों की सुविधा हेतु उनके लिए ट्रस्ट के द्वारा प्रशासनिक मार्गदर्शन में विश्राम स्थलो का निर्माण किया जा रहा है। हर पर्व व त्योहार पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। पुलिस प्रशासन के द्वारा यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है।